प्रिय मित्रो
प्रात:काल जागने पर सर्व प्रथम उस देव को अवश्य प्रणाम करना चाइये जिसने इस ब्रह्मांड को बनाया और उसे नियंत्रित भी करतें है । जिसने सूर्य ,पृथ्वी और चन्द्रमा को बनाया और वातावरण बनाया जिससे पृथ्वी जीवों के रहने के लिए उपयुक्त बनी । तत्पश्चात सूर्यदेव को प्रणाम करते हुए उनकी स्तुति निम्नाकित प्रकार से करनी चाइए:-
प्रात:काल जागने पर सर्व प्रथम उस देव को अवश्य प्रणाम करना चाइये जिसने इस ब्रह्मांड को बनाया और उसे नियंत्रित भी करतें है । जिसने सूर्य ,पृथ्वी और चन्द्रमा को बनाया और वातावरण बनाया जिससे पृथ्वी जीवों के रहने के लिए उपयुक्त बनी । तत्पश्चात सूर्यदेव को प्रणाम करते हुए उनकी स्तुति निम्नाकित प्रकार से करनी चाइए:-
आदित्याहरिद्य्स्तोत्रम
विनियोग
ॐ अस्य आदित्याहरिद्य्स्तोत्रस्यगास्त्यारिसिर्नुस्तुप छंद: , अदातियाह्रिद्याभुतो भगवान ब्रह्मा देवता निर्स्ताशेश्विघंत्या ब्रहाम्विद्यासिध्हौ सर्वत्र जयसिधौ च विनियोग:।
विनियोग
ॐ अस्य आदित्याहरिद्य्स्तोत्रस्यगास्त्यारिसिर्नुस्तुप छंद: , अदातियाह्रिद्याभुतो भगवान ब्रह्मा देवता निर्स्ताशेश्विघंत्या ब्रहाम्विद्यासिध्हौ सर्वत्र जयसिधौ च विनियोग:।
रिशियादिन्यास
ॐ औगुस्त्यारिशिये नम :,शिरसी । अनुस्थुप्छान्द्से नम :, मुखे । आदित्य-हरिद्य्भुत-ब्रहाम्देव्तायेह नम :, हिरदे । ॐ बीजाये नम :, गुय्हाये । राष्मिमाते शाक्तेय नम :,पदेयो :। ॐ तत्स्वितुरित्यादिगय्त्रिकील्काय नम :,नाभौ ।
करण्यास
इस स्तोत्रके अंगन्यास और करण्यास तीन प्रकार से किये जाते हैं । केवल प्रणव से ,गयात्रिमंत्रसे अथवा "राष्मिमाते नम:" इत्यादि ६ नाम-मन्त्रोंसे । यहाँ नाम-मन्त्रोंसे किये जाने वाले न्यास का प्रकार बताया जाता है:-ॐ रस्मिमाते अन्गुष्ठाभ्यम नम:। ॐ समुद्यते तर्जनिभ्यम नम: । ॐ देवासुर्क्रतायाय मध्यमाभ्याम नम:। ॐ विवास्माते अनामिकाभ्याम नम:। ॐ भास्कराय कनिस्थाकभ्याम नम:। ॐ भुव्नेश्व्राया कर्ताल्कार्प्रिस्थाभ्याम नम:।
हरिद्यादी अंगन्यास
ॐ रस्मिमाते हरिद्याये नम:। ॐ समुद्यते शिरसे स्वाहा ।
ॐ देवासुर्नामास्क्रिताय शिखाये वशट। ॐ विवस्वते कव्चाये हूम ।
ॐ भास्क्राए नेत्रत्रयाय वौशाथ । ॐ भुव्नेस्वरय अस्त्राय फट ।
इस प्रकार न्यास करके निम्नांकित मंत्र से भगवन सूर्य का ध्यान अवम नमस्कार करना चाहिये -

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